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Tue05152012
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राजस्थान में जहां आज 21वीं सदी में भी जातिवाद की जड़ें इतनी गहरी हैं कि दलित दूल्हों को घोड़ी पर नहीं बैठने दिया जाता, दलित महिलाओं से बदसलूकियों की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं और पूरे प्रदेश में जगह-जगह दलितों पर सवर्णों के दमन और आतंक की पुलिस-न्यायालय में शिकायतों के अंबार लगे हुए हैं, वहां अशोक गहलोत की कांग्रेस सरकार का एक कथित ब्राह्मणवादी बुद्धिजीवी सरकार की ही आलोचना करते हुए पूरी व्यवस्था को सवालों के घेरे में खड़ा कर रहा है। यह कथित बुद्धिजीवी कोई और नहीं, अपने आपको लेखक-पत्रका...
(प्रेस रिलीज) बीते 24 अप्रैल को अनिता भारती तथा बजर...
बिहार के बथानी टोला नरसंहार जुलाई 1996 के एक माहीने बाद वहां जाकर जायजा लेने वाले लेखक सुधीर सुमन ने तब वहां की असली तस्वीर को पेश किया था. पिछले दिनो...
16 साल पहले बिहार में 21 दलितों की हत्या करने वाले 23 नरपिसाच बरी हो गए हैं. अदालत ने सबूत नहीं होने की बात कहते हुए उन्हें बरी कर दिया है. इन सालों म...
बेजवदा विलसन (23) अपने समुदाय के बड़े-बुजुर्गों से अक्सर उनके काम के बारे में पूछते थे. शुरू-शुरू में तो उन लोगों ने विलसन की इस गुहार को अनसुना कर दि...
उत्तर प्रदेश की पीस पार्टी की तर्ज पर महाराष्ट्र में मुस्लिमों-दलितों का एक नया राजनीतिक दल उदय होने जा रहा है. अवामी विकास पार्टी नामक इस दल की औपचार...
ऐसे माहौल के बारे में सोचिए जब चारो ओर लोग ही लोग हों और सब किसी एक शख्स से जुड़े हो, ऐसा शख्स जो लाखों की भीड़ को एक करता हो. 14 अप्रैल को बाबा साहेब...
राजस्थान में अगड़ों और पिछड़ों की राजनीति ने किस तरह दलितों को सिर्फ इस्तेमाल किया है और उनकी अपनी राजनीतिक पहचान नहीं बनने दी है, इसका मज़बूत उदाहरण ...
मराठी और हिन्दी दलित साहित्य की वरिष्ठ साहित्यकार एवं अनुपम कृति ‘जीवन हमारा’ की लेखिका बेबी ताई कांबले हमारे बीच नहीं रही. बीते 21 अप्रैल, शनिवार को ...
मुझे यह मानने में कोई गुरेज नहीं कि कुछ महिने पहले तक मुझे अण्णाभाऊ साठे के बारे में बहुत कम पता था. बस इतना जानता था कि अण्णाभाऊ साठे एक साहित्याकर ह...
महाराष्ट्र के सांगली से लगभग 40 किलोमीटर की दूरी पर कावधे महान्का ताल्लुका में देवानंद लोंधे का हिंगन गांव है. वह लंबे समय तक अपने गांव से बाहर रहे. क...